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काढ़ा फॉर्मूला : कोरोनाकाल में सर्दी जुकाम बुखार गला बैठने में परम उपयोगी

वाराणसी। इस समय कोरोना का दूसरी कहर शहर से लेकर गाँवों तक भारत में अपना कहर बरपा रहा है। मैंने पहली बार एक काढ़ा का फार्मूला तैयार किया था जो इस कहर में बहुत ही फायदे मंद रहा। इसके सेवन से कोरोना के संक्रमण से बच गए या संक्रमित हुए तो प्रभाव अत्यंत न्यून रहा पर इस समय कोविड -19 के कई वेरिएन्ट आ जाने से इसके प्रारम्भिक लक्षण आने पर ही प्रहार आवश्यक है।

इस लिए मैं ने शहरी एवं गाँव के लोगों के लिए अलग-अलग उनकी सुबिध और आयुर्वेदीय औषधियों की उपलब्धता के साथ-साथ इस कोरोना से बचने और इसके चपेट में आने पर शुरुआत में ही प्रहार(चिकित्सा)प्रारम्भ कर दिया जाय तो सौ फीसद ठीक होने के उदेश्य से निम्न रूप में शहरी और ग्रामीण लोगों के लिए अलग-अलग फार्मूला को सेवन करने का सलाह दे रहा हूँ और इसेसे मैं ने अब तक 300-400 लोगों को संक्रमण मुक्त कर चुका हूँ।

शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के लिए -जब किसी भी व्यक्ति को सर्दी,खासी,बुखार,बदन दर्द और गले में खरास या गला बैठने की इन में से कोई भी सिकायत का अनुभव हो तो तुरंत आप निम्नलिखित का प्रयोग प्रारंभ कर दें आप के पास कोरोना नहीं आएगा –

  1. अजवायन सत्व मिश्रित गर्म पानी का भाप,गरारा (500मिलीग्राम
    फिटकिरी150 मिली लीटर पानी में मिला कर)दिन भर में दो बार 14 दिन
    तक।
  2. गोदन्ती भस्म- 500 मिलीग्राम
    रसपिपरी-1 गोली(125 मिलीग्राम)
    संजीवनी वटी-125 मिलीग्राम गिलोय सत्व- 1 ग्राम
    सितोपलादि चूर्ण या तालीसादी चूर्ण-3 ग्राम
    सहत्र पुटी अभ्रक भस्म-125 मिलीग्राम सुवर्ण वसंत मालती रस-100 मिलीग्राम यशद भस्म-250 मिलीग्राम उपरोक्त सभी को मिला कर पानपत्र स्वरस ,अदरख स्वरस एवं वासापत्र स्वरस सभी 10-10मिली लीटर के साथ प्रातः सायं दो बार एवं दोपहर में केवल सितोपलादि चूर्ण या तालीसादी चूर्ण-3 ग्राम,शहद से 14 दिन तक
    दें।
  3. श्वास कष्ट होने पर: कनकसव-15 मिलीलीटर समान भाग सुखोष्ण जल से दें।
  4. रात्री को सोने से दो घंटा पूर्व 150 मिलीलीटर सुखोष्ण दूध में 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण एवं 1 ग्राम हल्दी चूर्ण मिला कर पियें।(श्वास कष्ट हो तो पुष्करमूल चूर्ण 2 ग्राम मिलाएं) ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों के लिए : जब किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्ति को सर्दी ,खासी,बुखार ,बदन दर्द और गले में खरास या गला बैठने की इन में से कोई भी सिकायत का अनुभव हो तो तुरंतआप निम्नलिखित का प्रयोग प्रारंभ कर दें। आप कोरोना से संक्रमित नहीं होंगे ना ही अस्पताल जाने की जरूरत पड़ेगा नीम पत्र,तुलसी पत्र एवं अजवायन चूर्ण मिश्रित गर्म पानी का भाप,गरारा (500 मिलीग्राम फिटकिरी-150 मिली लीटर पानी में मिला कर) दिन भर में दो बार 14 दिन तक।
  5. सितोपलादि चूर्ण या तालीसदी चूर्ण -3 ग्राम (या काली मिर्च या मारीच 1भाग,सोंठ डेढ़ गुणा,पिप्पली दो गुणा,दालचीनी चूर्ण चतुर्थ भाग,छोटी इलायची चतुर्थ भाग ,वंश लोचन ढाई गुणा,इन सभी का दो गुणा मिश्री मिलाकर, अब-3 ग्राम की मात्र में) लें,

जायफल बीज चूर्ण-500मिलीग्राम, गोदन्ती भस्म-500 मिलीग्राम, टंकण भस्म -500 मिलीग्राम सभी को अदरख स्वरस ,पानपत्र स्वरस ,वासा पत्र स्वरस एवं गिलोय स्वरस, व शहद प्रत्येक 10 मिलीलीटर एवं तुलसी पत्र स्वरस 5 मिलीलीटर के साथ दिन भर में तीन बार लें 14 दिन तक। 2.दशमूलकाढ़ा(बेल,गंभारी,पाढ़ा(पाटला)शयोनाक,अग्निमंथ(अरणी)इन सभी का जड़ की छाल,शालपर्णी(सरिवन),पृश्नपी(पीठवन), कंटकारी(छोटी कटेरी),बृहती(बड़ी कटेरी), एवं गोखरू इन सभी का पंचांग इसके साथ पारिजात पत्र का काढ़ा बनाएं और कर्कटशृंगी चूर्ण 1 ग्राम मिलाकर 50 मिलीलीटर की मात्र में दोपहर रात को लें या चाय के जगह प्रयोग करें । 3. रात्री को सोने से दो घंटा पूर्व 150 मिलीलीटर सुखोष्ण दूध में 2 ग्राम
अश्वगंधा चूर्ण एवं 1 ग्राम हल्दी चूर्ण मिला कर पियें। (श्वास कष्ट हो तो पुष्करमूल चूर्ण 2 ग्राम मिलाएं) शहरी एवं ग्रामीण दोनों निम्न का अनुपालन जरूर करें।

  1. प्रति दिन प्रातःएवं सायं काल सभी आयु वर्ग के लोग 6 वर्ष से कम उम्र को छोड़ कर 45 मिनट से एक घंटा व्यायाम,प्राणायाम( गंभीर श्वास-प्रश्वास दोनों नासा रंध्रों से बारी-बारी से ,पुनः दोनों नासा रंध्र से गंभीर श्वास फिर मुख से निःश्वास,फिर मुख से गंभीर श्वास एवं नाक से निःश्वास प्रत्येक
    का कम से कम 10-10 आवृति करें) खुले स्थान में करें। 2. प्रातः स्नान से पूर्व एवं सायं काल तर्जनी अंगुली से तेल(सरसों)
    दो बूंद मात्र, दोनों नासा रंध्रों में लगाएं। 3. दिन भर में नमक (बी.पी. के मरीज को छोड़ कर ) ,चीनी(शुगर. के मरीज को छोड़ कर ) नीबू का रस मिला कर

कम से कम 3 लीटर गुनगुना पानी पियें। इसके जगह सुदर्शन
फन्ट उपलब्ध होने पर कर सकते है। 4. दिन भर में कुछ कुछ देर पर 1 से 2 लवंग को मुख में रख
कर चूसें कुल 5 से 6 इससे अधिक नहीं ।

  1. सुपाच्य,ताजा,तरल एवं फाइबर युक्त (हरी सब्जीयाँ) खाध्य सामाग्री का ही भोजन में अधिकता रखें।
  2. फलों में सीमित मात्रा में संतरा,कीवी,अनानास का ही सेवन
    करें।
  3. आत्मबल,मनोबल और दहबल सदैव उत्तम सुदृढ़ रखें अर्थात
    भय,चिंता,और मनोद्वेग से अपने आप को मुक्त रखें

साभार
डा.आशुतोष कुमार यादव

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