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चित्रकूट जेल में मरे तीनो अपराधियों का संक्षिप्त विवरण

आइए जानते है आज के चित्रकूट जेल कांड के बदमाशों का संक्षिप्त इतिहास जेल सूत्रों के अनुसार

अंशु दीक्षित : पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी का खास व शार्प शूटर था। सीतापुर का रहने वाला था। मप्र और उप्र एसटीएफ पर भी गोलियं चलाई थीं 27 अक्टूबर 2013 को। दिसंबर 2014 में इसे पकड़ा गया था। चित्रकूट जेल आधुनिक होने से इसे यहां करीब दो साल पहले भेजा गया था। पूर्वांचल के माफियाओं का चहेता भी बताया जाता है।

मेराज अली : वाराणसी का रहने वाला था। पहले मुन्ना बजरंगी का खास था, फिर मुख्तार से जुड़ा। इसकी अंशु दीक्षित से तनातनी रहती थी। संभव है उसी खुन्नस में अंशु ने इसे मारा हो।

मेराज अंसारी मुख्तार अंसारी का शुरू से खास आदमी रहा और वाराणसी में मुख्तार गैंग की कमान संभाल रहा था।पुलिस रिकार्ड के अनुसार मेराज अंसारी पर दर्जनों मुकदमे गंभीर में धाराओं में दर्ज हैं। मुख्तार अंसारी का नशे का कारोबार मेराज के पास था और मेरा परिवार एनडीपीएस के मुकदमों में जेल में बंद हुआ लेकिन गवाहों के अभाव में मेराज अंसारी न्यायालय ने बरी कर दिया था।

मेराज अंसारी मुख्तार गैंग के प्रमुख शूटर मुन्ना बजरंगी के रंगदारी के वसूली का काम भी देखता था।

मुकीम काला : पश्चिमी यूपी के दुर्दांत अपराधी व एसटीएफ के हाथों में मुठभेड़ में मारे जा चुके वसीम काला का भाई था। पंजाब हरियाणा तक इसका गैंग वारदातें करता था। सहारनपुर में वर्ष 2015 में तनिष्क ज्वैलरी शोरूम में डकैती कांड को अंजाम दिया था। दर्जनों लूट, हत्या व मुठभेड़ के मुकदमे दर्ज हैं।

पचिमी उत्तर प्रदेश का दुर्दांत अपराधी मुकीम काला पुलिस के गिरफ्त में आने के बाद के बाद पुलिस को ही रौब दिखाने लगा। जिसपर मेरठ के तत्कालीन कोतवाल ने मुकीम काला को कई थप्पड़ जड़ दिए जिसपर वह रोने लगा। बाद में पुलिस ने उसे जेल भेज दिया। कैराना में हिंदुओं के पलायन में वासिम काला और मुकीम काला का नाम चर्चा में रहा। 

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