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अपने हक की लड़ाई के लिए बीतें 19 दिन से धरने पर बैठे हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय के छात्रों को अभी भी नहीं दिखाई दे रही उम्मीद की कोई किरण 

वाराणसी। श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय दुर्गाकुंड के ठीक सामने हनुमान प्रसाद पोद्दार सेवा समिति ट्रस्ट विद्यालय को संचालित करता है। ट्रस्ट के सर्वेसर्वा बनारस के पूंजीपति किशन जालान  हैं। यह विद्यालय 1972 में बनकर तैयार हुआ और 1984/92 में क्रमशः इसे दसवीं और बारहवीं के लिए सरकारी मान्यता भी प्राप्त हुई। यह पूर्वांचल का सबसे बड़ा अंधविद्यालय है, यहां 250 विद्यार्थियों के पठन पाठन की आवासीय व्यवस्था है। 

केवल उप्र ही नहीं बल्कि बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, असम आदि राज्यों से भी दृष्टिहीन छात्र यहां पढ़ने आतें हैं। जालान ग्रुप के नेतृत्व में फरवरी 2019 में फैसला लिया गया कि श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय ट्रस्ट को बंद किया जाए। उन्होंने 16 मार्च 2019 को फैसला किया कि नौवीं से बारहवीं कक्षा तक बंद कर देना चाहिए।

वहीं पोद्दार अंध विद्यालय के पूर्व छात्र मंदीप शर्मा का कहना है कि वह विगत 19 दिनों से छात्रों के साथ धरने पर बैठें है पर प्रशासन की ओर से कोई उनकी सुध लेने अभी तक नहीं आया। मंदीप ने अपनी मांग बताते हुए कहा कि वह चाहते है इस विद्यालय का पुनः संचालन हो और इसे सरकार अधिग्रहित करें और सरकार इस प्रबंधन समिति को नष्ट कर के नई प्रबंधन समिति बनाये जो दिव्यांगों को समझें।
 
वहीं कहा जा रहा है कि, अब विद्यालय के जमीन और सम्पत्ति पर “जालान्स कपड़ा व्यापारी” की नजर गढ़ गई है। अब विद्यालय को धीरे-धीरे बन्द किया जा रहा है। वर्तमान सत्र में केवल 8 वीं तक प्रवेश हो रहा है। ताकि विद्यालय के बेशकीमती जमीन को हड़पकर जालान्स अपना स्टोर खोल सके।

विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे 19 दिन से बारिश और धूप में बैठे हुए हैं। लेकिन  शासन- प्रशासन पर कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा है इन बच्चों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आप सभी से विनम्र आग्रह है कि दृष्टिबाधित बच्चों के इस विद्यालय को बचाने में आप भी सहयोग करें, समय निकाल कर धरना स्थल पर जायें, सोशल मीडिया पर लिखें। सरकार विकलांगों को यदि दिव्यांग कह दे तो उससे उनका कल्याण नहीं होगा। अच्छी शिक्षा, गरिमापूर्ण रोजगार और सम्मान से विकलांगों का कल्याण होगा।

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