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खानपान में समझदारी ही सेहत को देगी खुशहाली, जाने खाने में कहीं आप भी तो यह गलतियां नहीं करते 

अंकिता यादव,

इस समय अपनी दिनचर्या और खाने-पीने का विशेष ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। अपने बेहतर स्वास्थ्य के लिए इस बात की भी जानकारी होना बहुत जरूरी है कि आप किस प्रकार का भोजन कर ग्रहण कर रहें है। इनका आपके शरीर पर क्या प्रभाव और दुष्प्रभाव पड़ रहा है। आज हम आपके लिए आयुर्वेद से जुड़े कुछ जरूरी तथ्यों की जानकारी लाएं है, जो आपको बताएंगे कि आपके लिए भोजन में क्या खाना उपयुक्त है और किस तरह से खाना लाभकारी होगा। इन सभी बातों को जवाब जानने के लिए पढ़े ये पूरी रिपोर्ट –

  • आयुर्वेद के अनुसा भोजन की थाली में बहुत थोड़े अंश में डाली गई तुलसी की पत्ती खाद्य पदार्थ में छिपे विषाणुओं को निष्प्रभावी करती है।
  • किसी समारोह में लंच/डिनर के वक्त सलाद नहीं खाना चाहिए। कटने के 10 मिनट बाद सलाद में हानिकारक तत्व उत्पन्न होने लगते हैं। घर में भी तत्काल कटा हुआ सलाद खाना चाहिए।
  • रात में दही या दही से बना कोई भी पदार्थ नहीं खाना चाहिए।
  • जिन फलों की प्रकृति मीठी हो, उसमें नमक लगा कर नहीं खाना चाहिए। यथा सेब, केला, अमरूद में नमक लगाकर खाना प्राकृतिक स्वरूप के विपरीत और हानिप्रद है।
  • चाय को दोबारा गर्म कर पीना स्वास्थ्य के लिए घातक है। चाय के साथ नमक मिश्रित पदार्थ नहीं खाना चाहिए, यथा, नमकीन, समोसा आदि।
  • आयुर्वेद के अनुसार जिस तरफ के हाथ से भोजन किया जाए, उसी हाथ से पानी पीना चाहिए। दाहिने से खाना और बाएं से पानी पीने पर निषेध है।
  • दिन हो या रात दोनों वक्त के खाने का समय नियमित होना चाहिए। कभी किसी समय और कभी किसी समय नहीं ।
  • खड़े होकर या कुर्सी पर बैठकर खाने से श्रेष्ठ पलथी लगाकर खाना चाहिए।
  • जिन तिथियों में जिन वस्तुओं का निषेध आयुर्वेदिक ग्रन्थों में बताया गया है, उसकी सूची रखकर उन तिथियों में नहीं खाना चाहिए।
  • भोजन के बाद यथा संभव 5 मिनट के लिए ही वज्रासन जरूर करें।
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