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छन्नू लाल मिश्रा की बेटी के मौत के मामले में सामने आया अस्पताल प्रबंधन, आरोप को बताया निराधार, दी ये जानकारी

नेहा द्विवेदी

वाराणसी। मेडविन हॉस्पिटल, मैदागिन के निदेशक डॉक्टर मनमोहन श्याम ने शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र की पुत्री डॉक्टर नम्रता मिश्र के हॉस्पिटल में इलाज संबंधी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि पंडित जी की पुत्री संगीता को जब हॉस्पिटल लाया गया था तो वह पिछले 10 से 12 दिनों से बीमार थी और घर पर ही लापरवाही पुर्वकअपना इलाज कर रही थीं जब हालत अति गम्भीर हो गई तब उन्होंने हॉस्पिटल में इलाज का निर्णय किया, प्रारम्भिक जांच में उनका ऑक्सीजन की मात्रा 74% थी, उनकी सांस बुरी तरह से फूल रही थी 3 दिनों से उल्टियां हो रही थी,वह लगभग 10 से 12 दिनों से बीमार थी और कोविड पॉजिटिव होकर घरेलू इलाज स्वंय से घर पर ही कर रही थी ,ऑक्सिजन भी लगा रखा था।

यही हालात इनकी माताजी की भी थी और इन लोगो ने जब उनकी भी हालत अत्यंत ही गम्भीर हो गयी तो मेरे यहा इलाज हेतु लाने के लिए कहा परन्तु मेरे यहाँ बेड उपलब्ध नही होने के कारण रविन्द्रपुरी स्थित ओरियाना हॉस्पिटल में ले गए जब वह पुरी गम्भीर हो चुकी थीं और वहा मात्र 5 घण्टे में ही उनकी मौत हो गई। ओरियाना हॉस्पिटल पर भी इनकी पुत्रियो ने लापरवाही का आरोप मुझसे स्वयं लगाया था और कहा था कि भर्ती होने के बाद 5 घण्टे तक उनको कोई दवा नही लगाई गई और खाना भी नही दिया गया और हॉस्पिटल की लापरवाही से उनकी मौत हो गयी। इन लोगो ने यह जरा भी नही सोचा कि लगभग 80 वर्षीय वृद्ध कोविड संक्रमित माता का इलाज घर पर करना कितनी बड़ी लापरवाही है ।इस सम्बंधित इनके परिवार के शुभ चिंतकों ने इन लोगो से बार बार आगाह भी किया था पर यह लोग जरा भी नही मानी।

इसी तरह से इनकी बहन मरीज संगीता की भी हालात जब काफ़ी बिगड़ गयी तब जाकर इन्होंने इलाज के लिए हॉस्पिटल का रुख किया। जब यह हॉस्पिटल आयी थीं तो अति गम्भीर थी प्रारम्भिक जांच में ऑक्सिजन की मात्रा 74 % और धड़कन काफ़ी बड़ी हुईं थी। ऑक्सिजन की इतनी कम मात्रा रोग की अत्यन्त गम्भीर अवस्था मे आती है जो कि लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा संक्रमण से आता है एवं स्वांश नलिका में काफी इंफेंक्शन हो जाता है। हमने पंडित मिश्र से उनकी पुत्री को भर्ती करने से मना भी किया परंतु उनके अनुरोध एवं उच्चाधिकारियो के आग्रह व पहल पर संगीता को भर्ती किया गया।

भर्ती से पहले इनकी पुत्रियो को रोगी की अत्यंत गम्भीर अवस्था ,रोग से ठीक होने की क्षीण सम्भावना और इलाज में होने वाले सरकारी दिशानिर्देसानुर खर्च के बारे में बता दिया गया था और उनकी लिखित सूचित सहमति के बाद ही भर्ती कर इलाज किया गया था।इलाज के दौरान रोजाना उन्हें मरीज की दशा के बारे अपडेट दिया जाता था। व्हाट्स एप्प पर वीडियो कॉल से समय मिलने पर बातचीत कराई जाती थी ,कुछ इमरजेंसी में फंसे होने के कारण मात्र एक दिन परिजनों से वीडियो कॉल से बात नही करवा पाने की वजह से परिजन इतना नाराज हो गये और घर बैठे विडियो कॉल से बातचीत मात्र एक दिन नही करवाने की वजह से जिलाधिकारी महोदय से दिनाक 28 अप्रैल को शिकायत कर दी। तब उन्होंने छुब्ध होकर किसी और हॉस्पिटल में रेफर करने की बात कही और मुझे इनको रेफर करने की सलाह दी। जब मैंने परिजनों गुरुजी छन्नू लाल, पुत्री ममता ,नम्रता को सूचित किया तो यह लोग घबरा गए और जिलाधिकारी महोदय से कहा कि हम लोग मेडविन हॉस्पिटल के इलाज से पूरी तरह से संतुष्ट है, यहा हमारी पूरी सेवा और ईलाज हो रहा है मेरे मरीज का पूरा ख्याल रखा जाता है,समय समय पर दवाइया दी जाती है खिलाया पिलाया जाता है और पंडित जी ने स्वयं निवेदन किया कि हमे कही और मत भेजिये यही रहने दीजिये।

डॉक्टर मनमोहन ने बताया कि भर्ती लेने के बाद उनका हर संभव बेहतर इलाज किया गया। उनके हालत में क्षणिक सुधार भी हुआ परन्तु 29 अप्रैल की शाम से ही अचानक उनकी हालत गम्भीर होने लगी ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से गिरने लगी उनका फेफड़ा फेल होने लगा उन्हें परिजनों को सूचित करने के बाद वेंटीलेटर पर तुरंत डाला गया तदुपरान्त उन्हें पल पल की खबर दी जाती रही परन्तु मध्य रात्रि में दिल का दौरा पड़ने की वजह से मरीज बच नही सकीं।

उन्होंने बताया कि डॉक्टर नम्रता का ढाई लाख रुपया लेने का आरोप गलत है जबकि दवा एवं ऑक्सीजन इत्यादि का पैसा इन लोगो ने इलाज करवाकर नही दिया,और तो और इन लोगों ने यह भी नही बताया कि किस आधार पर वयोवृद्ध माता और 50 वर्षीया बहन जो कि एक हफ्ते से भी ज्यादा समय से कोविड पॉजिटिव थी घर पर ही इलाज करते रहे और जब सब कुछ लगभग खत्म कर दिया तो हॉस्पिटल का रुख किया।

हॉस्पिटल और चिकित्सक पर दोषारोपण कर समाज और लोगों का ध्यान भटकाने के लिए लोक निंदा से बचने के लिए किया जा रहा सारा कृत्य अत्यंत दुखद अशोभनीय है। उनकी मुसीबत में सहायता करने वाले देवतुल्य चिकित्सको और हॉस्पिटल पर झूठा और निराधार आरोप लगाना निंदनीय है,परन्तु इन सब से परे हमे उनसे कोई शिकायत नही है ईश्वर गुरुजी और उनके परिवारजनों को इस दुखद घड़ी में शक्ति प्रदान करें।

डॉक्टर मनमोहन ने बताया कि गुरुजी पंडित छन्नूलाल मिश्रा एवं डीएम महोदय से हमने कॉन्फ्रेंस पर बात भी कराई थी। जिसमें पंडित जी ने पुत्री के इलाज पर संतोष जताते हुए किसी अन्य हॉस्पिटल में शिफ्ट नहीं करने का अनुरोध किया था। जिसकी पुष्टि जिलाधिकारी महोदय से भी की जा सकती है और इसकी कॉल रिकार्डिंग मेरे पास मौजूद है,अब, जबकि उपचार के दौरान उनका निधन हो गया तो उनकी दूसरी पुत्री हॉस्पिटल पर लापरवाही एवं लूटपाट का झूठा और निराधार आरोप लगा रही हैं। जो कि अत्यंत दुखद और अशोभनीय है।

परन्तु इनके इस दुर्व्यवहार से हम जरा भी आहत नही है, आदरणीय गुरुजी पर अभी दुखो का पहाड़ टूट पड़ा है ऐसी स्थिति में इनकी पुत्रियो द्वारा किया गया दुर्व्यवहार उस चिकित्सक के प्रति जिसके प्रसंशा करते हुए सारे परिवार वाले मात्र एक दिन पहले तक नही थकते थे उनको देवता ,संत दयावान क्षमावान की संज्ञा से सुशोभित भी करते थे आज यही लोग क्षण भर में इतना नाराज हो गए कि ना जाने कैसा कैसा इल्जाम लगा बैठे।

वही हॉस्पिटल जो इनके लिए मंदिर था और चिकित्सक संत वही जाकर पुत्रीगण ने अशोभनीय हंगामा किया उन हॉस्पिटल कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया जिन्होंने मुसीबत में इनकी सेवा की।

इनके द्वारा लगाए गए आरोपो में से प्रथम आरोप मरीज की मौत हुई इसका मतलब कोई इलाज नही हुआ अगर हुआ तो वीडियो फुटेज चाहिये वह यह भूल गई कि जब 5 दिनों से इनकी मरती हुई मरीज में जब सुधार हो रहा था तब कोई साक्ष्य क्यो नही मांगा ??

दूसरा आरोप इलाज के नाम पर लूट का है ,
परिजनो ने 2.5 दे दिया है हॉस्पिटल 5 लाख और माग रहा है !

वास्तविक सच्चाई :
भर्ती होने के 6 दिनों में केवल 1.5 लाख जमा किया और जिसमे से कुल खर्च ,
हॉस्पिटल 18000 प्रतिदिन के हिसाब से 6 दिन का का Govt RATE =
18000X 6= ₹108000
जांच का =1 0800
विशेष दवा का खर्च (INJ Remdesivir+ini Sepsivac = 29550
कुल खर्च = 1,48,350

मरीज की शेष जमा धनराशी = 150000-148350=
₹1650/

उपरोक्तानुसार जब मरीज का पहले से ही पैसा शेष है तो और पैसा मांगने का कोई औचित्य नहीं है और न ऐसा किया गया है इनकी बेटी कहीं 4 लाख कहती है कही 5 लाख दिया कहती है खुद ही स्योर नही है कितना दिया है और कितना देना ही ।

(Note: ऑक्सिजन Crises में ऑक्सिजन हमे कई गुना ज्यादा खर्च कर मंगवाया जा रहा है जिसका खर्च मरीज के उपयोग के अनुसार कुल 3500 x 6 =21000 हुआ जो कि हॉस्पिटल ने मरीज से चार्ज नही किया है )

इस दुखद घटना क्रम से परे उनकी बेटी के कृत्यों को नजरअंदाज और क्षमा करते हुए हम ईश्वर से प्रार्थना करते है कि ईश्वर गुरुजी के परिवार की शक्ति दे शांति दे और कल्याण करें।

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