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न बैंड न बाजा और न घोड़ी बराती, बिन फेरे हम तेरे की अनोखी शादी

शाहजहांपुर। जनपद के कलान थाना क्षेत्र पटना देवकली शिव मंदिर पर एक अनोखी शादी हुई। न सेहरा था, न दूल्हा घोड़ी पर बैठा। न बैंड बाजा था। शादी का अंदाज बिलकुल जुदा था, शादी हुई, लेकिन बिन फेरे हम तेरे की तर्ज पर। यह शादी गुरु शुक्राचार्य की पावन तपोभूमि पटना देवकली शिव मंदिर पर महंत गिरी द्वारा सम्पन्न कराई गई। इस प्रकार की शादी का उद्देश्य महज दहेज प्रथा को उखाड़ फेंकना था। यह शादी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि चर्चा भी होती क्यों नहीं।

ऐसी शादी यहां के लोगों ने शायद पहली बार देखी थी। कि बिना दान दहेज के यह शादी कैसे हो गई। आपने यह गाना तो सुना ही होगा फूल मांगू ना बहार मांगू मैं तो तेरा ही प्यार मांगू। जी हां बिल्कुल यहां ऐसा ही हुआ. न फूल मांगा और ना बहार मांगू और ना दहेज मांगा सिर्फ और सिर्फ उसका प्यार मांगा और जीवन के साथ रहने का साथ मांगा।

दहेज के लोभी बेटी की कीमत नहीं समझते, जबकि उन्हें यह पता है कि साथ हमारे कुछ नहीं जाएगा जाएगा।
लेकिन हम आपको ऐसी एक अनोखी शादी से आपका सीधा सरोकार कराने जा रहे हैं

यहां एक अनोखी शादी हुई, जिसमें वर-वधू बिना किसी बैंड बाजा व बरात के मात्र 17 मिनट में जीवन की डोर में बंध गए। शादी समारोह में उपस्थित मेहमानों समेत वर व वधू ने दहेज प्रथा का विरोध करते हुए यह जागरूकता संदेश सभी युवाओं तक पहुंचाने के लिए Nyoooz Aap पर अपनी बात रखी।

तो चलिए आपको बता दें की है शादी हुई कहां हुई है तो आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश जनपद शाहजहांपुर के कलान थाना क्षेत्र गांव सनाय के रहने वाले ब्राह्मण समाज के पुष्पेंद्र दुबे ने एक अनोखी शादी की , जिसमें उन्होंने दहेज में सिर्फ मांग की तो सिर्फ रामायण किताब की, और उन्होंने कहा कि हमें लोगों को बेटी की कीमत समझनी चाहिए. क्योंकि दान दहेज के लोभी बेटियों को दौलत में डाल देते हैं और गरीब घर की बेटी शादी की डोर में सिर्फ लड़के वाले दहेज की खातिर शादी रचाते हैं नहीं तो दहेज की खातिर उन्हें घर से बेघर कर दिया जाता है।

सनाय निवासी पुष्पेंद्र दुबे मीडिया में काम करते हैं, और इनके पिता एक किसान हैं जो कि खेतीवाड़ी करते हैं। और इनकी जीवनसंगिनी प्रीति तिवारी जोकि हरदोई की रहने वाली हैं, प्रीति ने बताया कि दहेज प्रथा ने बहुत से परिवारों को तबाह कर दिया है। इसे खत्म करने के लिए युवा वर्ग को आगे आना होगा।  और जब तक लोग सामाजिक बुराइयों को खत्म नहीं करेंगे , तब तक यह दान दहेज का बीड़ा खत्म नहीं होगा।

बहू से बढ़कर कोई दहेज नहीं है। एक पिता अपनी बेटी की शादी के लिए अपने जीवन की सारी पूंजी लगा देता है और ऐसे में वर पक्ष की ओर से दहेज की मांग करना सरासर गलत होता है।

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