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यूपी सरकार ने राज्य में लगाया एस्मा, सभी सरकारी विभागों में छह महीने तक हड़ताल पर रोक जारी

लखनऊ। कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर का प्रभाव कम होता जा रहा है। इसे देखते हुए स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने सभी कर्मचारियों को मोर्चे पर लगा दिया है। इसके साथ ही सरकार ने आवश्यक सेवा अधिनियम (असेंशियल सर्विसेस मेंटेनेन्स एक्ट) एस्मा को भी लागू कर दिया है।

योगी आदित्यनाथ सरकार के इस एक्ट को छह महीने तक और बढ़ाने के प्रस्ताव को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की भी मंजूरी मिल गई है। राज्यपाल ने भी सरकार के इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।सरकार ने स्वास्थ्य तथा ऊर्जा विभाग में संभावित हड़ताल को देखते हुए यह कदम उठाया और प्रदेश में लागू एस्मा को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के कारण हर तरफ बढ़ी परेशानी को देखते हुए पहले से लागू एस्मा को छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। आवश्यक सेवा अधिनियम के तहत अगले छह महीने तक प्रदेश में हड़ताल पर पाबंदी बरकरार रहेगी। 

प्रदेश में छह महीने तक एस्मा लागू होने के कारण अब कोई भी सरकारी कर्मी, प्राधिकरण कर्मी या फिर निगम कर्मी छह महीने तक हड़ताल नहीं कर सकेगा। उत्तर प्रदेश में छह महीने तक हड़ताल पर रोक लगा दी गई है। उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी विभागों, प्राधिकरणों, निगमों आदि में एस्मा के तहत अब छह माह के लिए हड़ताल पर रोक लगी है।  

क्या है एस्मा

आवश्यक सेवा रख-रखाव अधिनियम (एस्मा) लागू होने पर हड़ताल को अवैध माना जाता है। इसमें विभिन्न आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल किए जाते हैं। एस्मा का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को एक साल तक की सजा या जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है। एस्मा लागू होने के बाद पुलिस का यह अधिकार मिल जाता है कि वह कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना वॉरंट गिरफ्तार कर सकती है।

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