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Varanasi : इम्यूनिटी को करना है मजबूत तो छोड़ें नशे की लत, बीड़ी, सिगरेट व तंबाकू के सेवन से कोरोना का खतरा

वाराणसी। तम्बाकू, बीड़ी और सिगरेट के सेवन से कैंसर समेत तमाम बीमारियाँ शरीर को जकड़ लेती हैं क्योंकि इनके सेवन से शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर पड़ जाती है | कोरोना काल में इनका सेवन और भी ज्यादा नुकसानदायक है, क्योंकि कोरोना उन्हीं लोगों को चपेट में ले रहा है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है | धूम्रपान करने वाले अपने साथ ही आस-पास रहने वालों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

क्योंकि धूम्रपान करने वाले के फेफड़े तक केवल 30 फीसद धुआं पहुँचता है बाकी 70 फीसद धुआं निकटतम लोगों को प्रभावित करता है | यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ वीबी सिंह ने सोमवार को विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर दी । इस दौरान सीएमओ कार्यालय में तंबाकू निषेध पर शपथ भी दिलाई गयी । उन्होने बताया – तम्बाकू से उत्पन्न इसी समस्या को देखते हुए लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 31 मई को तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाता है | इस वर्ष इस दिवस की थीम ‘विजेता बनने के लिए तम्बाकू छोड़ें’ निर्धारित की गयी है| कोरोना काल में और भी खतरनाक 


मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया – 

तम्बाकू और बीड़ी-सिगरेट का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही नुकसानदायक है| कोरोना काल के समय इनका सेवन करना अर्थात मुसीबत को मोल लेना है| तम्बाकू के इस्तमाल से प्रतिरोधक क्षमता कम होती है साथ ही यह फेफड़ों को भी नुकसान देता है| बीड़ी-सिगरेट पीने या अन्य किसी भी रूप में तम्बाकू का सेवन करने वालों को करीब 40 तरह के कैंसर और 25 अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आने की पूरी सम्भावना रहती है। इसमें मुंह व गले का कैंसर प्रमुख हैं। यही नहीं धूम्रपान करने वालों के फेफड़ों तक तो करीब 30 फीसद ही धुँआ पहुँचता है बाकी बाहर निकलने वाला करीब 70 फीसद धुँआ उन लोगों को प्रभावित करता है जो कि धूम्रपान करने वालों के आस-पास रहते हैं । यह धुँआ (सेकंड स्मोकिंग) सेहत के लिए और भी खतरनाक होता है ।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व गैर संचारी रोग के नोडल अधिकारी डॉ पीपी गुप्ता बताते हैं कि धूम्रपान से सांस लेने की प्रक्रिया को नुकसान पहुँचता है | सांस की नली और फेफड़ों को नुकसान होता है | कोरोना वायरस गले और सबसे अधिक फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है| तम्बाकू और धूम्रपान करने वालों के फेफड़े पहले से मजबूत स्थिति में नहीं होते हैं, ऐसे में कोरोना वायरस बहुत जल्दी घातक रूप ले लेता है| क्योंकि वायरस से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है| साथ ही तम्बाकू खाने के बाद यहाँ वहां थूक देंने से भी कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा रहता है| सेकंड हैण्ड स्मोकिंग ज्यादा खतरनाक


डॉ गुप्ता ने बताया – अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं लेकिन आपके आस-पास कोई धूम्रपान करता है तो यह धुआं सिगरेट न पीने वाले के फेफड़ों में पहुँच जाता है| सेकंड हैण्ड स्मोकिंग का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव बच्चों और गर्भवतियों पर होता है| विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में लगभग 12 लाख लोगों की मृत्यु की वजह सेकंड हैण्ड स्मोकिंग है| बीड़ी-सिगरेट व तम्बाकू छोड़ने के फायदे भी बहुत हैं। 

धूम्रपान बंद करने के 12 मिनट के भीतर उच्च हृदय गति और रक्तचाप में कमी आ सकती है। 12 घंटे बाद रक्त में मौजूद कार्बन मोनो आक्साइड सामान्य पर पहुँच जाएगा । दो से 12 हफ्ते में खून का प्रवाह और फेफड़ों की क्षमता बढ़ जायेगी । इस तरह जहाँ शरीर निरोगी रहता है वहीँ घर-परिवार की जमा पूँजी इलाज पर न खर्च होकर घर-परिवार को बेहतर माहौल प्रदान करने के काम आती है । कोरोना ने एक तरह से इस आपदा को कुछ मामलों में अवसर में भी बदलने का काम किया है।इस अवसर पर एसीएमओ एके मौर्य, एसीएमओ डॉ एके गुप्ता, डॉ डीपी सिंह, डीपीएम संतोष सिंह, डॉ अतुल सिंह, डॉ सौरभ सिंह एवं अन्य लोग मौजूद थे।

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