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वाराणसी :- शिव की नगरी में मागंगा के आस्था की डुबकी से तरे  लोग, 

वाराणसी,:- ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में श्रेष्ठ नदी ‘गंगा’ स्वर्ग से अवतरित हुई थीं। गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के पर्व को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा आज के दिन भागीरथ के पूर्वजों की शापित आत्माओं को शुद्ध करने के लिए धरती पर अवतरित हुईं थीं। गंगा दशहरा पृथ्वी पर गंगा नदी के आगमन को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है। पृथ्वी पर अवतरण से पूर्व गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल में विराजमान थीं। इसलिए उनके पास स्वर्ग की पवित्रता है। पृथ्वी पर अवतरण के बाद स्वर्ग की पवित्रता उनके साथ आई। आमतौर पर यह त्योहार निर्जला एकादशी से एक दिन पहले मनाया जाता है।इस वर्ष भी लोगो गंगा दशहरा के दिन शिव की कशी में भी आस्था की दिउबकि लगाए और दानपुण्य किये, 

गंगा दशहरा पिछले वर्ष की भांति ही इस वर्ष भी कोरोना प्रोटोकॉल की भेंट चढ़ गया। बनारस में स्नानार्थियों के  गंगा स्नान पर रोक रही। दूर दराज क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु गंगा स्नान से वंचित हो गए। काशी के मुख्य घाटों दशाश्वमेध घाट, प्रयाग घाट, शीतला घाट, असि घाट, तुलसी घाट, हरिश्चंद्र घाट, मणिकर्णिका घाट, पंचगंगा व रविदास घाट पर स्नानार्थियों के जाने पर रोक रही। जल पुलिस चौकी से पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए बार-बार चेतावनी सूचना प्रसारित की जा रही थी। इलाकाई पुलिस प्रश्न घाटों पर और घाट जाने वाले मार्गों पर तैनात होकर लोगों को उल्टे पाँव लौटा रही थी।

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