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Varanasi : पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में खिलाड़ी इस लचर व्यवस्था से परेशान, खिलाड़ी सुविधाओ के अभाव में अपने भविष्य की जताई चिंता

वाराणसी। 29 अगस्त देश मे इस दिन राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। इस दिन देश मे खेलो को बढ़ावा देने के सरकार की तरफ से बड़े दावे किए जाते है लेकिन उत्तर प्रदेश में इन दावों पर पानी फिरता नजर आता है। हाल ही में हुए ओलंपिक गेम में जीतकर आए खिलाड़ियों का सम्मान करते हुए सरकार के द्वारा खेलो को नई ऊंचाइयों तक पहुचाने की बात कही गई लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यूपी में राजनीति की सबसे अहम पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ही खिलाड़ी इस लचर व्यवस्था से परेशान है। दरसल जिस स्टेडियम से एक समय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलते थे आज वहां के खिलाड़ी सुविधाओ के अभाव में अपने भविष्य की चिंता में है। 

कि आखिर वह खेल से अपना भविष्य कैसे आगे बढ़ाएंगे । क्या है वाराणसी में खेल की स्थिति देखिए हमारे खास रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में खिलाड़ियों का भविष्य संकट में दिखाई दे रहा हैं. शहर के संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में बिना कोच के खिलाड़ी सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं. हॉकी से लेकर हैंडबॉल तक के ग्राउंड बनाए गए हैं लेकिन कोरोना काल के बाद से खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए यहां कोच नहीं है। ऐसे में ये खिलाड़ी बिना कोच के ही अपने भविष्य को संवारने में लगे हैं।हॉकी के राष्ट्रीय प्लेयर दिलशाद खां ने बताया कि यहां खेलने के लिए ग्राउंड तो है लेकिन खिलाड़ियों का भविष्य संवारने के लिए कोच नहीं है. इसके अलावा खिलाड़ियों को यहां खेल का सामान भी प्रशासन की ओर से उपलब्ध नहीं हो पाता। 

अक्सर ग्राउंड में घासों की कटाई भी नहीं होती जिससे खिलाड़ियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.हैंडबॉल प्लेयर शुभम सरोज ने बताया कि स्टेडियम में यदि कोच होते तो यहां के खिलाड़ी भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। खिलाड़ियों के इन समस्याओं को लेकर जब क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आर पी सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि कोरोना काल से पहले शासन स्तर से 6 अस्थायी कोच की नियुक्ति की गई थी लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया. खिलाड़ियों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए हम लोग सीनियर प्लेयर की मदद से उन्हें ट्रेनिंग दे रहे हैं. लेकिन सवाल ये है कि आखिर बिना कोच ओलंपिक का सपना देखने वाले ये खिलाड़ी कैसे अपना भविष्य संवारेंगे। 

असुविधाओं के बीच अपना भविष्य संवारने में लगे खिलाड़ियों के सामने काफी दिक्कतें है। जहां एक ओर राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर के खेलों में ट्रेंड खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती पेश करने के लिए कहा जाता है लेकिन सुविधा के नाम पर देने के लिए यूपी सरकार के पास कुछ भी नही है। ऐसे में खिलाड़ियों के सामने यह परेशानी है कि बिना कोच और बिना कोई सुविधा के वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को कैसे चुनौती पेश करेंगे। बहरहाल यूपी की खेल विभाग से अब खिलाड़ियों को बस उम्मीद ही है कि यह उनके भविष्य के लिए कुछ कर पाए।

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