TopUPvaranasi

Varanasi : कर्मचारी समाज के सजग प्रहरी महामना स्वर्गीय बीएन सिंह की पुण्यतिथि पर राज्य कर्मचारियों ने दी भावभीनी श्रध्दांजलि

वाराणसी । राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने वर्चुअल बैठक कर कर्मचारी समाज के सजग प्रहरी महामना स्वर्गीय बीएन सिंह की पुण्यतिथि मनातें हुए भावभीनी श्रध्दांजलि दी।

बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष शशिकान्त श्रीवास्तव ने कहा कि आज के परिवेश मे लोग अपने लिए सब कुछ करते हैं और अपने लिए ही जीते हैं। बहुत कम ऐसे महापुरुष होते हैं जो दूसरों के लिए जीवन पर्यंत जीते हैं उन्हीं में से स्व.बी.एन.सिंह जी रहे जो अपने तथा अपने परिवार के बारे में कुछ नहीं सोचा और जो भी सोचा वह समस्त 90 प्रतिशत कमेरा समाज के लिए।राज परिवार में जन्मे स्वर्गीय बी.एन. सिंह जी की प्रबल इच्छा शक्ति गरीबों के प्रति प्यार एवं कुछ कर गुजरने की सोच रही जिसे वह मूर्त रूप देकर तीन दशकों तक कर्मचारी संगठनों एवं संघर्षों के पर्याय बने रहे।

स्वर्गीय बीएन सिंह उत्तर प्रदेश सचिवालय में भर्ती होकर शासकीय सेवा प्रारंभ कर कर्मचारी संगठनों में प्रभावी भूमिका उनकी दिनचर्या बन गई। देश के आजादी के प्रारंभिक वर्षों में कर्मचारियों के मानस पटल में दासतां की हीन भावना समाप्त भी नहीं हो पाई थी कि उन्हीं दिनों स्वर्गीय सिंह साहब ने 26 फरवरी 1966 को स्वर्गीय रघुबीर प्रसाद शर्मा की अध्यक्षता में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के गठन में कामयाबी हासिल कर ली जो कुछ महीनों में संघर्षों का पर्याय बन गया राज्य कर्मचारियों के पहले प्रदेश व्यापी विधानसभा के सामने 16 अप्रैल 1966 के प्रदर्शन,उत्तर प्रदेश सचिवालय के कर्मचारियों द्वारा 26 मई 1966 से सामूहिक आकस्मिक अवकाश तथा दिनांक 14 जुलाई 1966 को जीपीओ पार्क में विशाल आम सभा एवं मशाल जुलूस तथा 15 जुलाई 1966 को शांतिपूर्ण सचिवालय की आम सभा में तात्कालिक मुख्य सचिव केके दास एवं पुलिस उपमहानिरीक्षक इस्लाम अहमद द्वारा कराए गए लाठी चार्ज के विरोध में 11 दिनों तक चली हड़ताल एवं महंगाई भत्ते में की गई कुछ वृद्धि के साथ हुए सरकार के समझौते में स्वर्गीय बीएन सिंह जी की प्रमुख भूमिका रही।

जिला मंत्री श्याम राज यादव ने सर्व.बी.एन.सिंह के कृत्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केंद्र प्रांत महंगाई भत्ता एक करो- छटनी नोटिस बंद करो की मांग को लेकर दिनांक 7 दिसंबर 1966 से पूरे प्रदेश में चली ऐतिहासिक हड़ताल जिसका प्रचार विदेशों में भी व्यापक स्तर पर हुआ था,का ही परिणाम रहा कि कर्मचारी समाज गुलामी से बाहर निकल सका है। इस बीच कुछ कर्मचारी नेताओं में गुपचुप बैठक कर सरकार से समझौता करने का प्रयास करने लगे।उसी समय तात्कालिक अध्यक्ष स्वर्गीय रघुवीर प्रसाद शर्मा जी बैठक में पहुंचकर उन्हें समझाने का प्रयास करने लगे चूंकि कतिपय लोग सरकार को सहमति दे आए थे।

इसलिए वह रघुवीर प्रसाद शर्मा को भी बात करने लगे थे उसी समय स्वर्गीय बीएन सिंह जी ने सभा में पहुंचकर बलपूर्वक उन व्यक्तियों के चंगुल से उन्हें छुड़ा लाए।परिणाम स्वरूप 62 दिनों तक चली सफल हड़ताल के बाद स्व. पी.एन. शुकुल जी के नेतृत्व में वार्ता हुई समझौता हुआ और केंद्र के समान प्रांत महंगाई भत्ता एक हुआ। बैठक में संरक्षक एवं पेंशनर्स कल्याण संस्था के जिलाध्यक्ष राजेश्वर पाण्डेय ने बताया कि 21 सितंबर 1967 के प्रादेशिक रैली के बाद 18 अक्टूबर 1967 से पुनः हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल में स्वर्गीय बीएन सिंह सहित 76 कर्मचारी सेवा से अलग कर दिए गए जिन्होंने 4 वर्ष 6 माह तक दुकानों आदि पर काम करके अपने बच्चों का पेट पाला स्वर्गीय बीएन सिंह जी पंडित रघुवीर प्रसाद शर्मा की अध्यक्षता में गठित कार्यकारिणी के महामंत्री बने सभी संगठन में अलगाव, कभी एक जैसी झेलते हुए 1984 तक राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री के रूप में तथा 1984 से प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपने मृत्यु दिनांक 18 मई 1999 तक अनेकों उपलब्धियां प्रदेश के राज्य कर्मचारियों को दिलाते रहे ।

मण्डल अध्यक्ष दिवाकर द्विवेदी ने बताया कि 10 मई 1999 को मुख्य सचिव ने परिषद के पदाधिकारियों सहित अनेक लोगों से कह चुके थे कि मकान किराया भत्ता, ग्रामीण आवास भत्ता,नगर प्रतिकर भत्ता माननीय मुख्यमंत्री जी आगामी सितंबर माह से देना चाहते हैं परंतु 19 मई को स्वर्गीय सिंह साहब के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद मुख्य सचिव डॉक्टर योगेंद्र नारायण ने ठाकुर साहब से जनवरी में हुए वादे का हवाला देकर उसी दिन के मंत्रिपरिषद द्वारा जून 1999 में भुगतान आदेश करा दिया इस तरह अपने पुरोधा के आखिरी लपटों ने भी लाखों लाख कर्मचारियों का भला कर गई।

मण्डल मंत्री दिपेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि स्वर्गीय बीएन सिंह साहब ने केंद्र और प्रांत का वेतन एक समान हो मांग को लेकर वर्ष 1986 में भी हड़ताल का कुशल नेतृत्व करके राज्य कर्मचारियों एवं शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है देश के कर्मचारियों को मिली सफलता से उत्साहित होकर अनेक प्रदेश के कर्मचारियों ने भी केंद्रीय वेतनमान की लड़ाई लड़ी कमोवेश जीती ही है। वर्ष 1994-95 में प्रदेश तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को दो प्रोन्नत वेतनमान मांग को दिए जाने की मांग को लेकर 51 दिनों तक चली हड़ताल भी स्वर्गीय श्री सिंह साहब के नेतृत्व, उनका इगोशियेशन मानस पटल पर आज भी अंकित है।

उन्होंने अपने व्यक्तित्व के बल पर राज्य कर्मचारियों के बिना लड़ाई के अनगिनत उपलब्धियां दिलाई ।बैठक में सर्वश्री संतोष कुमार सिंह, शशांक शेखर पाण्डेय, कैलाश नाथ यादव, विष्णु गुप्ता, सुधांशु सिंह, जितेन्द्र पाण्डेय, विरेन्द्र प्रताप सिंह, सुरेंद्र नाथ पाण्डेय, अतुल कुमार सिंह, अश्वनी श्रीवास्तव ,विवेक सिंह, सुभाष सिंह, शशिकांत सिंह, अरविन्द दूबे, ऋषि सक्सेना आदि दर्जनों लोगों ने भागीदारी की।

liveupweb
the authorliveupweb